हास्य कविता999+
चलो बाजार में चलते हैं, चूड़ियों का डब्बा खरीदें, सस्ती में मिल रहा है, तब क्यों ना आज हम सब इसमें बचत करें। जब तक दुकान पहुंचें, साथी बोले ध्यान रखो, डब्बे की साइज़ चेक करो, बिना वापसी के आजाएँ ना अपने घर को। डब्बा खोला, देखा सामान, चूड़ियों की धूप, पर दुकानदार ने कहा, "भैया, ये तो अब ज्यादा है ऊपर रूप।" अब हाथ में आया बड़ा खेल, मुँह पर थूका धूप, सस्ता मिलने की ख़ुशी में, अब खरीदेंगे क्या यही बस चूड़ियों का गुप्प। धुंआ उठा हंसी का, जब वापसी पे गए तो, बिना सस्ते के, मिल रहे थे वो चूड़ियाँ हमें माफ़, हो! सोचा यह ज़रा, क्या सचमुच है अच्छा खरीदना, क्योंकि अभी भी सस्ता मेहंगा, हमें नहीं समझना। सच्चे हास्य के लिए तैयार हो जाओ, बड़े मजेदार हैं, सबके पसंद ये रंगीली ओर! सुबह उठो, चेहरा सजा के हँसने का, ज़िन्दगी है कॉमेडी, गजब का अद्भुत नाटक है ये! रसोई में जाओ, तमाशा देखो मस्ती का, तैयार हैं सब, फूल गए हैं सभी रंगीन फर्से पर! दोस्तों के साथ बैठो, कहानियाँ सुनो हंसी की, मुस्कुराहट की डोलाक बजाओ, दिल खुशी से झूम उठे फिर! हास्य का जादू, सभी को लबों पर लाए, हर कोने में खुशियों का उत्सव,...