हास्य कविता
जब रोज़ खा रहा था मैं दोस्तों के साथ,
एक आवाज़ सुनाई दी, बच्चे की हँसी की बात।
धुंआ उठा इस जगह से, देखा मैंने उस तरफ़,
बच्चा था, हंसी मचा रहा, बिना किसी को डर के।
उसने कहा, "आज परीक्षा है, किताबें हैं तैयार,
लेकिन सोचा नहीं, बारिश में बच्चों का खेल देखता जाऊं यार।"
जबरदस्त था उसका मन, देखो उसकी आँखों में,
विद्यार्थी बना उसने जीने का नया मीठा तरीक़ा बसाया।
हाथ में लेकर किताबें, निकला पढ़ने के लिए,
बच्चों की हँसी ने उसके दिन को बना दिया खास, सही।
इसीलिए कहता हूं, जीवन में खुशी को ज़रूर बाँटो,
हाँ, यही एक सच्ची हास्य कविता, जीवन की रचना का तारीका हो।
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